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अकबरपुर बुलंदशहर में महफिले आल इंडिया मुशायरा का आयोजन

नई दौलत को पाकर जो भुला देता है अपनों को, वो दौलत के नशे में कुछ ज़ियादा चूर होता है..... फ़हीम कमालपुरी

इक़बाल सैफी – बुलंदशहर

शुक्रवार की रात्रि बज़्मे इल्मो अदब अकबरपुर के अंतर्गत,जश्ने में शादी गंगा जमुनी तहज़ीब को समर्पित महफिले ऑल इंडिया मुशायरे का भव्य आयोजन किया गया। जिसकी सदारत वरिष्ठ शायर जनाब ऐजाज़ अंसारी देहलवी ने की और संचालन गुलज़ार जिगर देवबंदी ने किया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि जनाब आसिफ अली गुड्डू, नदीम अख़्तर, मोमिन अकबरपुरी, फहीम कमालपुरी, डॉ निज़ामी शैदा राही आदि ने रिबन काटकर एवं शमा रोशन करते हुए किया। कार्यक्रम का आयोजन संयोजक फरहाद आलम, दिलशाद आलम नौशादआलम, फहीम कमालपुरी आदि ने किया।

मुशायरे का शुभारम्भ डॉ सैय्यद निज़ामी शैदा राही ने ये नातेपाक पढ़कर किया कि दोनों आलम के मुख़्तार प्यारे नबी, सारे नबियों के सरदार प्यारे नबी सुनाई तो पंडाल श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। इनके बाद फहीम कमाल पूरी ने पढ़ा कि नई दौलत को पाकर जो भुला देता है अपनों को, वो दौलत के नशे में कुछ ज़ियादा चूर होता हैं। सुनाकर वाहवाही लूटी। अल्ताफ ज़िया मुंबई ने श्रोताओं की फ़रमाइश पर एक के बाद एक कई ग़ज़लें सुना कर महफ़िल में चार चाँद लगाए। उन्होंने सुनाया कि मेरी पतवार मेरे हाथ में है, समंदर की अना है और मैं हुँ। मैं एक सच हूँ ज़माना हाथ धोकर, मेरे पीछे पड़ा है और मैं हूँ। डॉ सैय्यद निज़ामी शैदा राही ने ये पढ़ा.यूँ तो लोग दुनिया में किसको क्या नहीं कहते, हम तो बेवफा को भी बेवफा नहीं कहते। अध्यक्षता कर रहे ऐजाज़ अंसारी दिल्ली ने पढ़ा कि अजीब हाल है इस दौर की सियासत का, यहाँ चराग़ ज़्यादा हैं रोशनी कम है। डॉ सैय्यद नज़्म इक़बाल दिल्ली ने पढ़ा कि जुगनू चराग़ चाँद कभी कहकशां के साथ, बाँधा गया है मुझको तेरी दास्ताँ के साथ। ऐन मीम कौसर ने पढ़ा कि चाँद सूरज की तरह तुम मौतबर हो जाओगे, शायरों से दोस्ती करलो अमर हो जाओगे।

मक़सूद जालिब सिकंदराबादी ने सुनाया कि जिसका ज़मीर ज़िंदा वो आदमी है ज़िंदा, वरना तो इस जहान में जीते हैँ जानवर भी। वरिष्ठ शायर इरशाद अहमद शरर ने कहा कि हक़ीक़त है अदाकारी नहीं है, ये मेरा इश्क़ बाज़ारी नहीं है। नवाज़िश नज़र शामली ने पढ़ा कि लहू का रंग महकता हुआ अभी तक है, हमारे ख़ून में बूऐ वफ़ा अभी तक है। तरन्नुम निशात नैनीताल ने कहा कि मैं हूँ रूहे ग़ज़ल आशिक़े मीर हूँ, पढ़ें मुझे ग़ौर से हर सू तहरीर हूँ। चाँद फटाफट बिजनौर ने इस दौरे तरक़्क़ी ने क्या धूम मचाई है, शोहर फटे कपड़ों में फैशन में लुगाई है, सुनाकर खूब गुदगुदाया। अमजद आतिश खतौली ने कहा कि जबतक मैं एक क़तरा था मेरा वजूद था, दरया से करके दोस्ती पछता रहा हूँ मैं।मोमिन कबरपुरी ने पढ़ा कि
मिला है दर्दे दिल मुझको तो हसरत है मेरी मौला,
वो जज़्बा बख्श दे कि ज़िंदगी को दास्ताँ कर लूँ। अशोक साहिब गुलावठी ने पढ़ा कि
नफ़रतों की दास्ताँ , गंदी सियासत तक रहेगी,ये मुहब्बत ऐसी शय है जो क़यामत तक रहेगी। इनके साथ ही डॉ रियाज़ मालिक दिल्ली, असलम जावेद, गुलज़ार जिगर, सुमन बहार ख़ुर्जा, लियाक़त कमालपुरी, आदि ने अपनी शानदार शायरी सुनाकर खूब वाहवाही लूटी और मुशायरे को सफल बनाया। कार्यक्रम का समापन प्रातः 4 बजे हुआ। अंत में कंवीनर फहीम कमालपुरी और आयोजकों फरहाद आलम, दिलशाद आलम नौशादआलम, मुंशाद आलम और फहीम कमालपुरी आदि ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए सभी शायरों को यादगारी मोमेंटो पेश किये।

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